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भारत के प्रमुख  राष्ट्रिय आंदोलन

भारत के प्रमुख राष्ट्रिय आंदोलन



भारत के प्रमुख  राष्ट्रिय आंदोलन 

Part-1

Bharat ke pramuk andolan




भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस की स्थापना (1885 ई.)


कांग्रेस कौ स्थापना 1885 ईं. मेँ  ए ओ ह्यूम द्वारा की गई थी जोकि एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश प्रशासनिक अधिकारी थे । इसका प्रथम अधिवेशन दिसम्बर, 1885 ई. मेँ बम्बई मेँ हुआ जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चंद बनर्जी ने की । 


बंगाल का विभाजन (1905 ई.) 


बंगाल में राष्ट्रिय चेतना को समाप्त करने के उदृदेश्य से लॉर्ड कर्जन द्वारा 16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल का विभाजन कर दिया गया |

मुस्लिम लीग की स्थापना (1906 ई.) 


इसके संस्थापकों में आगा खाँ, नवाब सलीमुल्ला और नवाब मोहसीन उल मुल्क प्रमुख थे , जिन्होंने 1906ई. में इसकी स्थापना क्री। 

होमरूल लीग आन्दोलन (1916 ई.) 


संवैधानिक उपायों द्वारा स्वशासन प्राप्त करने के उतूदेश्य से भारत में होमरूल लीग की स्थापना की गई । बाल गंगाधर तिलक ने 28 अप्रैल, 1916 को महाराष्ट्र में 'होमरूल लीग' की स्थापना की । सितम्बर, 1916 ईं. में ऐनी बेसेण्ट द्वारा मद्रास मेँ "अखिल भारतीय होमरूल लोग' की स्थापना की गई। 

जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड (13 अप्रैल 1919 ई.) 


रौलेट एक्ट के विरोध में जगह-जगह जन सभाएँ आयोजित की जा रही थीं। इसी दौरान सरकार ने पंजाब के लोकप्रिय नेता डॉ. सैफुदृदीन किचलु और डॉ. सत्यपाल को गिरफ्तार कर लिया। इसी गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक जनसभा आयोजित की गई, जिस पर जनरल डायर ने गोली चलवा दी, जिससे सैकडों लोग मारे गए। 


असहयोग आन्दोलन (1930 ई.) 


लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हुए कलकत्ता अधिवेशन में गाँधी जी के नेतृत्व में असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव पारित हुआ । उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित चौरी -चौरा नामक स्थान पर 5 फरवरी , 1922 को आन्दोलनकारी भीड ने . पुलिस के 22 जवानों क्रो थाने के अन्दर जिन्दा जला दिया । इस घटना से गॉधी जी अत्यन्त आहत हो गए और उन्होंने 12 फरवरी , 1922 को असहयोग अल्दीलन वापस ले लिया


कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1930 ई.) 


1929 ईं. के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता पं. जवाहरलाल नेहरू ने को जिसमें "पूर्ण स्वराज' क्रो अन्तिम लक्ष्य माना गया। 

दायडी यात्रा (1930 इं.) 


अपने 78 अनुयायियों के साथ गाँधी जी ने साबरमती आश्रम से 12 मार्च, 1980 को दाण्डी के लिए यात्रा आरम्भ की। 24 दिन की लम्बी यात्रा के पश्चात् 6 अप्रेल, 1930 को दाण्डी में पहुँचकर गाँधी जी ने सांकेतिक रूप से नमक कानून तोडा और सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया। इसे नमक सत्याग्रह के रूप मे भी जाना जाता है।  

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