Amazing history of India : प्राचीन भारत का अद्भुत इतिहास
दुनिया में कई सभ्यताएं आई और चली गई. पर प्राचीन भारत आज भी अपनी सभ्यता बनाए हुए हैं. प्राचीन भारत का अद्भुत इतिहास (Amazing history of India ) कितना वैभवशाली रहा इससे सभी अवगत हैं. आज हम भारत के प्राचीन इतिहास को लेकर कुछ रोचक बातें जाने वाले हैं.
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| Amazing history of India |
प्राचीन भारत का अद्भुत इतिहास (Amazing history of India )
वाराणसी
भारत का शहर वाराणसी दुनिया के सबसे प्राचीन और पवित्र बसे शहरों में से एक है. इसे बनारस कहा जाता है. ऋग्वेद में इसका जिक्र काशी के रूप में मिलता है. यह शहर 3000 साल पुराना है. पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने 5000 साल पहले इस शहर की स्थापना की थी. हिंदू धर्म में 7 पवित्र शहर है. जिनमें काशी को सबसे पवित्र माना जाता है. जैन और बौद्ध धर्म में भी वाराणसी को पवित्र शहर माना गया है.
सिंधु घाटी सभ्यता
सिंधु घाटी सभ्यता के जन्म से ही भारत का इतिहास शुरू हुआ माना जाता है. यह दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक थी. सभी सभ्यताओं में यह सबसे ज्यादा विकसित और फैली हुई थी। नगर योजना आधारभूत संरचना के आधार पर यह शहर अति विकसित था।इससे पता चलता है कि भारत शुरुआत से ही प्रतिभाशाली देश रहा है।
1920 में जब पुरातत्व विभाग ने सिंधु घाटी में खुदाई की तो वहां इस सभ्यता के दो पुराने शहर मिले। यह शहर थे मोहनजोदड़ो और हड़प्पा। यह दोनों ही भाग आज पाकिस्तान में है।
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शून्य की खोज
शून्य के बिना आज गणित की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हालांकि शून्य ( 0 ) का कोई मान नहीं होता, पर अगर यह किसी संख्या के साथ जुड़ जाए तो उसका मान कई गुना तक बढ़ा देता है।
सर्वप्रथम ब्रह्मगुप्त ने 628 BC में शून्य के प्रतीकों का सटीक रूप से प्रयोग किया था। पर इसका प्रयोग सर्वप्रथम भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने किया। इसी कारण इन्हें 0 का जनक माना जाता है। सिद्धांत ना देने के कारण उन्हें सुनने का मुख्य अविष्कारक नहीं माना जाता। आर्यभट्ट ने जीरो की सही अवधारणा दी, इसी कारण यह सत्य है कि उन्हें सुनने का आविष्कारक माना जाता है।
भारत सोने की चिड़िया
British शासन से पहले भारत दुनिया के सबसे धनी देशों में से एक था। आज भारत कैसा भी हो पर इसका इतिहास बेहद वैभवशाली रहा है। प्राचीन काल में भारत को उसकी असीम संपत्ति के लिए जाना जाता था। इसी कारण भारत सोने की चिड़िया नाम से प्रसिद्ध था। कोलंबस भी भारत की खोज में निकला था पर अमेरिका पहुंच गया। इसके बाद 1498 में वास्को द गामा भारत में आने वाला पहला यूरोपियन था।


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